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छायांकार : प्रवीण मंगल ब्यावर 
ब्यावर इतिहास के झरोखे से.......
✍वासुदेव मंगल की कलम से.... 

1 फरवरी को ब्यावर शहर का 185वें स्थापना दिवस पर विशेष

1 नवंबर 1956 को ब्यावर को राजस्थान प्रदेश में मिलाकर उपखण्ड बनाया गया था। इसके पहले ब्यावर सन 1952 से अजमेर राज्य का जिला बनाया गया था मेरवाड़ा स्वतंत्र प्रदेश को अजमेर में मिलाकर। सन् 1952 से पहले ब्यावर मेरवाड़ा प्रदेश के नाम से इसकी स्थापना 1 फरवरी 1836 से जाना जाता रहा था। ब्यावर के इतिहास के दो काल खंड हैं।
पहला कालखंड स्थापना से लेकर 1956 की 31 अक्टूबर तक, 120 साल 9 महीने का, जो ब्यावर के विकास का युग रहा। उस काल में ब्यावर ऊन ,कपास, अनाज और सर्राफा व्यापार में भारत के 7 शहरों में से एक था। ये शहर थे पंजाब प्रांत का फाजिल्का शहर, उत्तर भारत का कानपुर शहर, मध्य भारत का इंदौर शहर, मुंबई का राजकोट, भावनगर और मुंबई और राजपूताना का ब्यावर शहर। ब्यावर क्षेत्र के विकास के ये 121 साल रहे।
यहां पर यह बताना अति आवश्यक हो गया है फिर ऐसा क्या हो गया कि इन 63 वर्ष और 3 महीने में ब्यावर क्षेत्र का पराभव क्यों किया गया इसके पीछे लेखक को केंद्र और राजस्थान प्रदेश की तब से लेकर अब तक की सरकारों की राजनीतिक संकुचित विचारधारा प्रतीत होती है। चूंकी मेरवाडा स्टेट की स्थापना एक अंग्रेज सैन्य अधिकारी कर्नल चाल्स जॉर्ज डिक्शन द्वारा की गई थी। अतएव इसके विकास को, राजस्थान प्रदेश मे, ब्यावर क्षेत्र को मिलाते वक्त, पराभव की ओर मोड़ दिया गया, सोची समझी गई विचारधारा के अंतर्गत, गुलामी की निशानी मानते हुए, तत्कालीन शासनकर्ताओं से लेकर अब तक के तमाम केंद्र सरकार और राजस्थान प्रदेश की सरकारों के तमाम शासनकर्ताओं के द्वारा।
वास्तव में भारत के कर्णधारों द्वारा ऐसा करना ब्यावर क्षेत्र की जनता का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। ऐसा करना राजस्थान की सरकारों को शोभा नहीं देता अमुख क्षेत्र की जनता के साथ भेदभाव करके। इसमें ब्यावर क्षेत्र का क्या कसूर है कि इसके विकास को अवरुद्ध किया गया 63 वर्षों से। क्या ब्यावर क्षेत्र की जनता जनप्रतिनिधि को वोट नहीं देती रही? तो फिर ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है ब्यावर क्षेत्र की जनता के साथ, अन्याय क्यों? लेखक द्वारा क्षेत्र की जनता की तरफ से राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री जी से सीधा महत्वपूर्ण सवाल है। 
अगर आप सीधे तौर पर बिना भेदभाव के इस बात का न्याय करेंगे तो आप स्वयं इसका उत्तर हाँ में ही देंगे।
अतः आज ब्यावर के 185वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री जी आप संकल्प ले कि बहुत राजनीति हो चुकी अपनी जगह। राजा तो सारी प्रजा के लिए एक होता है। इस भावना के साथ आने वाले बजट सत्र में ब्यावर को जिला घोषित करने का संकल्प लेकर ब्यावर की जनता की भावना का आदर करें। आपका नाम ब्यावर के इतिहास में अमर हो जाएगा। लेखक की इस अग्रिम कार्य को करने के लिए आपको अग्रिम शुभकामनाएं होगी। 1 नवंबर 1956 को जन्मा यह शिशु अब तो 63 साल 3 महीने का जवान हो चुका है। अब तो प्रदेश के इस शिशु की जवानी का ख्याल रखते हुए इसके अतीत के गौरव को पुनः लौटा दो आने वाले बजट सत्र में इसे जिला घोषित करके मुख्यमंत्री जी। 
राज्य के विकास में इसके नैसर्गिक और स्वतंत्रता संग्राम में इसके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए यह जिले का पारितोषिक प्राप्त करने का अधिकारी भी है। अतः ब्यावर क्षेत्र की जनता की अंतरात्मा की आवाज अबकी बार जरूर सुनेंगे।
यह क्षेत्र जिले के तमाम मानदंड जैसे क्षेत्र, जनसंख्या, राजस्व व पशुधन, उपखंड, तहसील, पंचायतें, थाने आदि आदि सब सुलभ रखता है। आप चाहे तो इस क्षेत्र का अग्रिम सर्वे करके इसकी तमाम उपलब्धताओं को परख सकते हैं।
1 फरवरी 1836 को यह ब्यावर शहर स्थापना के समय स्वतंत्र मेरवाड़ा स्टेट के नाम से लगातार 1951 तक 115 साल तक अपने पूरे कलेवर में भारत का मेरवाड़ा स्टेट के नाम से सुविख्यात रहा जिसकी पदवी दादा की रही। तत्पश्चात इसमें अजमेर राज्य को मिलाया गया 1952 से लेकर 1956 की 31 अक्टूबर तक इसकी पदवी पिता की हो गई। 1 नवंबर 1956 को इसको अजमेर जिले का उपखण्ड बनाकर राजस्थान प्रदेश में मिलाते वक्त इसकी पदवी बेटे की हो गई जो 2002 की 30 मई को मसूदा उपखंड इसके एक हिस्से को बनाया गया तो इसकी पदवी पिता की हो गई। आज यह जवान बेटा 19 साल 8 महीने का हो गया। सन 2013 में इसके एक और बेटा टॉडगढ़ उपखंड हुआ जो 6 साल 1 महीने का युवा हो गया। अतएव मुख्यमंत्री जी अब तो इस पर तरस खाकर इसको अपना हक जिले का देवें, ब्यावर क्षेत्र की जनता की यही वाजिब मांग है।
वर्तमान में इस क्षेत्र में पांच उपखंड, सात तहसील, पांच पंचायत समितियां और इतनी करीब 150-160 तक की ग्राम पंचायत है करीब 10 लाख की आबादी इतना ही पशुधन और करीब 15-20 थाने समाहित हो सकते हैं। अतः श्री सीमेंट व अंबुजा सीमेंट का मोह छोड़कर राज्य सरकार को ब्यावर को जिला घोषित करना चाहिए यह ही समय की पुकार है। अन्यथा ब्यावर की जनता को अपना हक प्राप्त करने के लिए आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ब्यावर की 185वें स्थापना दिवस पर लेखक की क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई।
।। जय हिन्द।।

 

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