‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com

17.07.2026

नया नगर, मेरवाड़ा बफर स्टेट और ब्यावर जिला एक ही स्वरूप है
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लेखक: वासूदेव मंगल, फ्रीलान्सर, ब्यावर सिटी

डिक्सन ने नया नगर बसाने की अधिसूचना 10 जुलाई 1835 को, इसकी आधार शिला 1 फरवरी 1836 को, और नगर के बाजारों का निर्माण 1 मई 1836 को तथा मेरवाड़ा बफर स्टेट 1838 में बनाकर इसको अमली स्वरूप प्रदान किया था। ज्योतिष में चूँकि दक्षिण दिशा के तीन रूप है पूर्व-दक्षिण जिसको आग्नेय कोण कहते हैं दूसरा दक्षिण दिशा का पूरा हिस्सा जो यम और पित्तरों का घर माना जाता है और तीसरा हिस्सा दक्षिण-पश्चिम का नैऋत्य कोण जो पृथ्वी तत्व का हिस्सा है।
व्यापार की दृष्टि से इसे शुभ माना गया है। इसीलिए नया नगर तहसील की सिविल कॉलोनी दक्षिण दिशा में परनाला के पश्चिम-दक्षिण के ऊँचाई वाले और उत्तर-पूर्व दिशा के ढलवा पठार के दोनों तरफ राष्ट्रीय मार्ग आठ के दक्षिण की तरफ बिचड़ली. शाहपुरा जुड़वाँ गाँवों पर बसाई गई थीं जो ही वर्तमान मे ब्यावर जिले का मुख्यालय है।
मेरवाड़ा बफर स्टेट मे सात परगने क्रमशः नयानगर - मसूदा - बिजयनगर - बदनौर - भीम - टाटगढ़ और आबू शामिल किए गए थे उस समय (काल) के हिसाब से और अबः- अब ब्यावर जिले में भी तहसीले (उपखण्ड) शामिल किए गए है- सिर्फ (मात्र) फर्क आबू और भीम तहसीलों (उपखण्ड) की जगह रायपुर और जैतारण तहसील (उपखण्ड) और भीम उपखण्ड की बार उप तहसील को शामिल किया गया है। इस प्रकार सात तहसील (उपखण्ड) और आठवीं भीम उपखण्ड। तहसील की बार भीम उप तहसील मिलाई गई है। इस प्रकार ब्यावर जिले में सात उपखण्ड (तहसील) और उपखंड (तहसील) की बार उप तहसील अर्थात आठ उपखण्ड (तहसीलों) का मिश्रण स्वरूप है जिसकी परिधि रेडीयस चारों ओर चालिस किलोमीटर तक है जिसमे प्रचुर प्राकृतिक सम्पदा के भण्डार भरे पड़े है जैसे:- बड़े और छोटी छोटी छितरी हुई पहाड़ियाँ और खाईयाँ दूर दूर तक फैली हुई है। पठार, हरे भरे घास के मैदान, तथा कृषि भूमि, पशु चरागाह इत्यादि अवस्थित है। पहाड़ों मे बहुमूल्य खनिज सम्पदा दबी भरी पड़ी है जैसे- थोरियम- क्रोमियम- रेडियम- लीथियम- यूरेनियम धातु, अभ्रक, बहुमूल्य कीमती ग्रेनाइट स्टोन (पत्थर), पट्टी कातला पत्थर- चुना पत्थर - गिट्टी पत्थर सिमेण्ट बनाने का क्वार्टज् पाउडर - कोकरी व सिनेटरी पॉट बनाने का सिरेमिक पाउडर। घने जंगल जिसमें जड़ी बूटियां - ईमारती लकड़ी - कई प्रकार की वनस्पति पाई जाती है, व जगली जानवर विचरण करते है जैसेः- शेर- चीता - हिरण - नील गाय - बारहसिंगा, खरगोश लोमड़ी इत्यादि, चरागाह में पालतू पशु पाये जाते है जैसेः- गाय-बैल - भेड़-बकरी - ऊँट - भैंस इत्यादि।
इस प्रकार कई प्रकार के उद्योग धन्धे लगाए व विकसित किए जा सकते हैं जिससे बेरोजगारी की समस्या हल हो सकेगी एवं केन्द्र व राज्य सरकार की रेवेन्यु (राजस्व) मे अभूतपूर्व ईजाफा (वृद्धि) होगी। जिससे आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इन वस्तुओं से एलाईड कई प्रकार के नये व्यापार विकसित हो सकेगें। क्रॉनिक व्यापार सुदृढ़ होंगें। इस प्रकार ब्यावर जिले में विकास की विपुल संभावना है
आवश्यकता है मात्र राजस्थान प्रदेश और केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकारों की ईच्छा शक्ति जागृत होने की।
यहाँ पर व्यापार और उद्योग विकास के सभी कॉनिक घटक पहले से मौजूद है जैसेः- कच्चा माल- पावर (बिजली) - समृद्ध बाजार - पूँजी बाजार - स्किल्ड लेबरे - उपभोक्ता बाजार इत्यादि जन शक्ति। ट्रान्सपोर्ट की सुविधा - भण्डारण व्यवस्था - कृषि उपज मण्डी की सुविधा - उन्नत व्यापारिक बाजार - परिवहन कनेक्टिविटी - सस्ता श्रम। यह क्षेत्र विविधता में एकता की स्थली है जैसेः- धार्मिक स्वतन्त्रता - जातीय स्वतन्त्रता - व्यापारिक स्वतन्त्रता - सामाजिक समरसता - आर्थिक स्वतन्त्रता सभी जातियों में प्रेम भाव - मेलजोल - सभी के उत्सव - त्यौहार - सभी धर्मो जातियों की उपासना पद्धति, स्कूल, चिकित्सालय - औषधालय।
मनोरंजन के लिए सिनेमा - थियेटर - नृत्यु, कला संगीत - रिक्रियेशन के लिए खेल के मैदान, जिम शेल्टर, व्यायामशालाएँ - सुरक्षा प्रबन्ध - न्यायालय - परिवहन सुविधाएँ - धर्मशाला - नदी नाले, कुएँ बाबड़ी, तालाब - मॉल - वाचनालय - पुस्तकालय आवश्कता है ‘अ’ श्रेणी का जिला अस्पताल - ‘अ’ श्रेणी की कृषि उपज मण्डी - ट्रान्सपोर्ट नगर - स्टेडियम - मेडीकल कालेज - इंजिनियरिंग कॉलेज - पालोटेकनिक इन्स्टीट्यूट। यहाँ पर बारह लाख के करीब ब्यावर जिले की आबादी है और जिले की चालिस माईल्स की परिधि है जिसमे उन्नत विधान सभा सभाओं का क्षेत्र अवस्थित है जैसे - सोजत, जैतारण, ब्यावर, मसूदा भीम व आसीन्द। अतः नये सीमांकन में ब्यावर क्षेत्र सभी प्रकार के मानदण्ड रखता है। अतः नए में ब्यावर जिले को संसदीय क्षेत्र केन्द्र सरकार अधिसूचना के जरिये घोषित करे। ताकि इस जिले को राजनैतिक संसद सदस्य का प्रतिनिधित्व मिल सके।
इसी प्रकार व्यापारिक और औद्योगिक क्रॉनिक केन्द्र होने के कारण यहाँ पर बाहर के व्यापारियों की निरन्तर वर्ष पर्यन्त आवाजाही रहती है। अतः ब्यावर मे हवाई अड्डा (एरोड्रम) की भी अत्यन्त आवश्यकता है। इसके लिए सराधना, अजमेर से मांगलियावास, पीसांगन रूट माकूल है हवाई-पट्टी के लिए। इसका पहिले भी सर्वे हो चुका है। यहां पर हवाई यात्रा के लिए यात्री भार भी बहुतायत से है जिससे केन्द्र सरकार के रेवेन्यु मे भारी ईजाफा होगा और ब्यावर जिले का सम्पूर्ण और सघन विकास हो सकेगा। आवश्यक जानकर ब्यावर के जागरूक वरिष्ठ स्वतन्त्रत लेखक की सरकार से मांग है यदि तह दिन से भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार ब्यावर जिले का विकास करना चाहती है तो।
अभी तक आपको कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन द्वारा नया नगर परगना के तीन भागों में और मेरवाड़ा बफर स्टेट के इतिहास के बारे में लेखक वासुदेव मंगल ने बताया अतः आप इतिहास के बारे में शुरू से वाकिफ हो गए होंगे।
 

 

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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