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ब्यावर इतिहास के झरोखे से.......                  ✍वासुदेव मंगल की कलम से.......
छायाकार - प्रवीण मंगल (मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर)

आज 28 जनवरी सन् 2023 को लाला लाजपत राय
का 159वाँ जन्म दिन एवं 158वाँ साल


लेख प्रस्तुतकर्त्ता : वासुदेव मंगल
लालाजी का जन्म पंजाब प्रान्त के मोगा जिले के दुधिके गांव में 28 जनवरी सन् 1865 ईसवी में गुलाबदेवी की कोख से हुआ था। उनके पिता का नाम राधाकिशन आजाद था।
लालाजी जगें आजादी के गदर के वातावरण में जन्में थे। अतः उनका रूझान स्वतन्त्रता की ओर हो गया। वे क्रान्तिकारी सन्यासी ऋषि दयानन्द के उपदेशों से प्रभावित होकर क्रान्तिकारी हो गए।
चूंकि गोपाल कृष्ण गोखले उस समय अहिन्सावादी रास्ते से स्वतन्त्रता के पक्षघर थे। ठीक उसी वक्त गरम दल बनाकर देश में कांग्रेस के ये तीन क्रान्तिकारी नेता उभर कर आये जो लाल, बाल और पाल के नाम से विख्यात हुए।
लाला लाजपत राय बनिया जाति के अगरवाल थे। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना की।
प्रारम्भिक जीवन :- बचपन में ही उनकी माँ ने उनको नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी। सन् 1885 में उन्होंने हिसार में वकालत की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की। लालाजी हिसार नगर पालिका के सदस्य और सचिव रहे। 1992 में लालाजी लाहौर आ गए।
स्वतन्त्रता संग्राम ने एक क्रान्तिकारी मोड़ ले लिया था। सन् 1911 में अंग्रेजों ने अपनी राजधानी कलकत्ता से दिल्ली बनाई। उस समय दिल्ली में पंचम जार्ज के सानिध्य में दिल्ली में दरबार लगाया जिसमें देश के 562 देशी रियासतों के राजा महाराजाओं ने शिरकत की।
अतः ऐसी स्थिति में जब अंग्रेज भारत में अपनी शासन पद्धति को मजबूत करने में लगे थे तब देश के पंजाब, उत्तर भारत, मध्य भारत, बम्बई प्रान्त, बंगाल और राजपूताना में क्रान्तिकारी विप्लव के जरिये आजादी में प्राण फूंक रहे थे।
अतः इसी सिलसिले में लालाजी प्रचार के लिये सन् 1914 में ब्रिटेन गए। परन्तु प्रथम विश्व युद्ध छिड़ जाने के कारण वे भारत नहीं लौट पाये ओर अमेरिका चले गए।
अमेरिका में लालालजी ने इण्डियन होम लीग ऑफ अमेरिका नाम संस्था की स्थापना की और यंग इण्डिया नामक एक पुस्तक लिखी जिसे प्रतिबन्धित कर दिया गया।
सन् 1920 में विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद वे भारत लौट आए।
यहाँ पर लेखक लालाजी के निजी सचिव पण्ड़ित सुन्दरलालजी शर्मा का, जिन्होंने ब्यावर में रहकर भारत में अंग्रेजी राज पुस्तक के तीन जिल्द लिखे का उल्लेख इसलिये कर रहे हैं कि यह पुस्तक भी साथ में प्रतिबन्ध कर दी गई थी।
अमेरिका से लौटने पर लालाजी ने पंजाब में जलिया वाला बाग नरसंहार के खिलाफ विरोध प्रर्दशन और असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व आरम्भ कर दिया। उन्होंने कांग्रेस इंडिपेन्डेन्स पार्टी की स्थापना की।
वर्ष 1928 में ब्रिटिश सरकार ने संवैधानिक सुधारों पर चर्चा के लिये साइमन कमीशन को भारत भेजा परन्तु कोई भी भारतीय सदस्य इस कमीशन में नहीं होने के कारण इस कमीशन का पूरे भारत में जबरदस्त विरोध हुआ।
पंजाब के लाहौर में लालाजी ने स्वयं ने साइमन कमीशन के खिलाफ एक शान्ति-प्रिय जुलूस का नेतृत्व किया पर ब्रिटिश सरकार ने बेरहमी से जुलूस पर लाटी चार्ज करवाया।
लाला जाजपत राय को सिर पर गम्भीर चोंटें आई जिसके कारण 17 नवम्बर 1928 को उनकी मृत्यु हो गई।
28 जनवरी 1965 को भारतीय डाक विभाग ने उनकी जन्म शताब्दी पर एक डाक टिकट भी जारी किया। यह टिकट भारत INDIA 0.15 का हैं जिस पर हिन्दी और अंग्रेजी में लाला लाजपत राय LALA LAJPAT RAI छपा है।
यहां पर यह वर्णन करना भी उचित होगा कि ब्यावर में भी अंग्रेजी राज होने के कारण 1911 के दरबार में ही भारतवर्ष के साथ साथ ब्यावर में भी पहले हिन्दू कमीश्नर भी बृजजीवनलालजी चतुर्वेदी मथुरावालों को और उनके साथ ही श्री पोलरामजी गार्गिया पोखरण जैसलमेर वालों को ओक्ट्रॉय कमीशनर पोस्टेड किये गए। ये सन् 1920 के बाद तक अपने-अपने पदों पर काम करते रहे।
ब्यावरहिस्ट्री डाट कॉम परिवार आज उनकी जयन्ती पर उनको शत् शत् नमन करता है।

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