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ब्यावर इतिहास के झरोखे से.......                  ✍वासुदेव मंगल की कलम से.......
छायाकार - प्रवीण मंगल (मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर)
 

 

3 अप्रेल 2023 को 2563 पूर्व जन्में
वर्धमान से भगवान महावीर जैन धर्म के चौबिसवें तीर्थकर की जयन्ती पर आज विशेष

लेखक : वासुदेव मंगल
विश्व के मानचित्र पर भारत एक अकेला ऐसा देश है जहाँ विविधता में एकता वाली संस्कृति विद्यमान है।
इस देश में अनेक धर्म, विभिन्न भाषाएँ, भिन्न-भिन्न प्रकार की जातियों वाले लोग सदियों से साथ-साथ भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में रहते चले आए है। विविधता में एकता ही इस देश का मूलमन्त्र है।
अतएव इसी वजह से भारत वर्ष की संस्कृति अक्षुण हैं इस प्रकार की इन्द्र धनुषि संस्कृति भारत के सिवाय अन्य किसी भी देश में नहीं हैं
भगवान महावीर जैन धर्म के मूल सिद्धान्त जियों और जीने दो के प्रवर्तक है जो जैन धर्म के चौबिसवें तीर्थंकर है।
जीवों के प्रति दया का भाव ही जैन धर्म का आधार है।
जैन धर्म एक पूर्णतः अहिंसक जीवन पद्वति हैं।
भारतीय समाज को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले महावीर का वास्वतिक नाम वर्धमान था।
आपका जन्म बिहार के वैशाली के पास स्थित कुंडल ग्राम में ईसा से 540 वर्ष पूर्व सिद्धार्थ और त्रिशा (लिच्छवी राजकुमारी) के घर चैत्र शुक्ला तृयोदशी को हुआ था।
इस दिन जैन समुदाय भगवान महावीर का जन्म दिन बड़ी धूमधाम और हर्षोंल्लास के साथ मनाते है।
जैन धर्म के अनुयायी जैन मन्दिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा पर जलाभिषेक करते है। इस दिन जैन मन्दिर विशेष रूप से जैन झण्डों से सजाये जाते है। और आकर्षक रोशनी की जाती है। हाथी, घोड़ो और विभिन्न प्रकार की झाँकियों के साथ जुलूस निकाले जाते है।
अतः इस दिन महावीर जयन्ती बड़ी धूमधाम के साथ सारे भारतवर्ष में भव्य शोभा यात्रा के साथ मनाई जाती है।
भगवान महावीर बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान गौतम बुद्ध के समकालिन थे। दोंनों ने मोक्ष की कुँजी के रूप में आत्म अनुशासन, ध्यान और तपस्वी जीवन के महत्व पर जोर दिया है।
भारतवर्ष में वर्षपर्यन्त उत्सव त्यौंहार चलते रहते है। कभी देश के किसी भाग में तो अन्य दिन देश के किसी अन्य भाग में अन्य धर्म के अनुयायियों द्वारा। अतः ये मेले और त्यौहार देश की विविध प्रकार की संस्कृति को जीवन्त रक्खे हुए है।
ऐसा उत्सव भारत के सिवाय अन्य कहीं देखने को नहीं मिलता और यह ही कारण है कि यह संस्कृति सदियों से इसी प्रकार जीवित है। इसकी परम्परा सदियों से निरन्तर इसी प्रकार चलायमान है।
इस अवसर पर जैन धर्म के अनयायियों को लेखक की ओर से ढे़र सारी बधाई और शुभमामनाएँ।
इस दिन भारत सरकार पूरे देश में विशेष अवकाश रखती है।
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