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ब्यावर इतिहास के झरोखे से.......

✍वासुदेव मंगल की कलम से.......
छायाकार - प्रवीण मंगल (मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर)

ब्यावर जिले का विहंगम दृश्य

आलेखः वासुदेव मंगल
प्रस्तावना: ब्यावर तो स्थापना से ही सर सब्ज, सदाबहार ईलाका रहा है। स्थापना के दो वर्ष पश्चात ही सन् 1838 ई0 मे वूल एण्ड कॉटन का राष्ट्रीय मार्केट बन गया था जहाँ बूलियन एण्ड ग्रेन के मार्केट भी साथ साथ काम करने लगे थे। ब्यावर गुन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में ही ट्रेड एण्ड कॉमर्स में भारत का प्रमुख मार्केट बन गया था। यह सेठाणाँ नगर कहलाया। ब्यावर से ही हुण्डी बिल्टी दस्तावेजी व्यापारिक चलन शुरू हुआ था जो पूरे भारत वर्ष के व्यापार के माध्यम के करेन्सी साख माध्यम का प्रमुख जरिया बना जो दर्शनी हुण्डी के नाम से विख्यात है, प्रचलित है आज भी ट्रेड जगत में।
ब्यावर का यह ट्रेड मार्केट 1838 से 1938 तक एक शताब्दी तक बदस्तूर कायम रहा। बाद में भी लगभग आधे सदी तक कम रफ्तार से जारी रहा।
हालांकि इसके संस्थापक डिक्सन जो ईस्ट इण्डिया कम्पनी के प्रतिनिधि रहे बाइस साल तक ही इस ईलाके के मुकादम रहे। जून 1857 में उनका इन्तकाल ब्यावर में ही हुआ था। उन्होंने तो इस ईलाक का नाम नया नगर चार दीवारी में रक्खा तथा इसे मुख्यालय के रूप में मेरवाड़ा बफर स्टेट का नाम बाहर मारवाड़ मेवाड और मगरे का ईलाका मिलाकर रक्खा।
1 दिसम्बर 1858 में ब्रिटिश इण्डिया की हुकुमत ने इस ईलाके का नाम ब्यावर रखकर हुकुमत करना शुरू किया। इस प्रकार ब्यावर उस जमाने में ही मारवाड़, मेवाड़ तथा मेरवाड़ा संस्कृति का सेतु बना।
दिनांक 5 अगस्त सन् 2023 ब्यावर के इतिहास में एक स्वर्णिम दिन होगा कि 188 वर्ष बाद हमारी राजस्थान प्रदेश की गहलोत सरकार ने 67 सड़सठ साल पहले इसकी खोई हुई अतीत की गौरवता और विरासत को एक बार पुनः ब्यावर को जिले के रूप में उसी स्वरूप को बहाल किया है जो अतीत मे मेरवाड़ा बफर स्टेट के नाम से विख्यात रहा है मात्र भीम उपखण्ड के कुछ भाग को राजसमंद जिले में रखते हुए मात्र राजसमंद जिले के महत्व को बनाये रखने के लिये।
ब्यावर जिला जिसकी स्थापना 7 अगस्त 2023 को बड़ी उमंग और जोश खरोश के साथ मनाई जा रही है मुख्य मन्त्री श्री अशोक गहलोत वर्चुअली संवाद के जरिये ब्यावर जिले की नामपट्टिका का अनावरण करेगें और ब्यावर वालों से संवाद करेगें जिले के बारे में।
इस अवसर पर ब्यावर जिले की जनता को नये जिले के तोहफे के उपलक्ष मे लेखक की बहुत बहुत बधाई।
विविधता में एकता अब लेखक आपको यह बता रहे हैं कि ब्यावर जिला विविधता में एकता लिये हुए होगा और यह ही इस जिले की पहिचान होगी। पुनः एक बार ब्यावर जिले के नाम से ब्यावर मेरवाड़ा बफर स्टेट की अतीत की गौरव गाथा जग जाहिर होगी।
अब ब्यावर जिले में:-
ब्यावर के नये सृजित जिले की विशेषता - भाषा, पहनावे, खानपान में विविधता लिये हुए होगा हमारा ब्यावर जिला मारवाड मेवाड़ और मेरवाड़ा की संस्कृति का सेतू बना ब्यावर जिला ब्यावर जिला पर्यटन, उद्योग और गौरवशाली इतिहास का सँगम इस क्षेत्र की परम्परा बनेगी, पहिचान तेजा मेला व बादशाह मेला, ब्यावर जिले की प्रकृति मन मोहक टाटगढ़ रावली अभ्यारण्य का प्राकृतिक सौंदर्य, सेन्दडा की चट्टानें, बदनोर की विविध प्रकार की स्टोन खदानें, रायपुर की बजरी, मसूदा की ग्रेनाईट की खदाने, सिमेण्ट उद्योग का हब, मिनरल कारोबार का इतिहास, जिप्सम के रूप मे रा मटिरियल, सिरेमिक उद्योग की प्रबल संभावना, फेल्सपार रा मटीरियल की भरपूर उपलब्धि के कारण। मेन्यूफेक्चरिंग गुड्स के यार्ड की सुविधा, ब्यावर का अ श्रेणी का रेल्वे स्टेशन के जंक्शन की संभावना के साथ ही सभी यात्री रेलगाड़ी के ठहरने की संभावना।
खान पान:- मगरा की दाल-लापसी, मारवाड़ की लापसी और मोटा रो खाटो, मगरा की मक्का की रोटी व उड़द की दाल, मारवाड़ मे बाजरे का होगरा व खाटा, ब्यावर की तिलपट्टी तो सेन्दड़ा के दही बड़े, बिजयनगर के अमरूद, रामगढ़ का मावा, बर के घेवर अतः ब्यावर मे आने वाले सैलानियों भाँति भाँति के व्यंजनों का स्वाद मिलेगा।
विभिन्न प्रकार की बोलियाँ:- बदनोर भाषा का अपनत्व मारवाड़ की भाषा का मिठास तो मगरा क्षेत्र के शौर्य का समावेश। ब्यावर जिले मे दो कोस पर पानी तो नो कोस पर वाणी का बदलाव देखने को मिलेगा। ब्यावर जिले में संस्कृति की विविधता की समृद्धि होगी।
व्यापार उद्योग:- औद्योगिक दृष्टि से ब्यावर एक राजस्थान प्रदेश में ही नहीं अपित भारत देश में एक सशक्त जिला होगा। ब्यावर में सिरेमिक उद्योग, ग्रेनाईट स्टोन उद्योग व मार्केट की प्रबल संभावना है जिसके चलते नये उद्योग और व्यापार से ईजाफा होगा।
राजस्व: सिमेण्ट हब के कारण तीन हजार पैतिस सौ करोड़ से बढ़कर दोगुना राजस्व लगभग सात हजार करोड़ रुपया सालाना बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना बन गई है।
अब ब्यावर जिले का प्रशासनिक ढाचा: एक नज़र
क्षेत्रफल: ब्यावर जिले का क्षेत्रफल 52 लाख 48 हजार 611 हेक्टेयर है।
संस्कृति: मारवाड़, मेवाड़ व मगरा की संस्कृति का ब्यावर जिले में समावेश।
जनसंख्या: ब्यावर जिले की जनसंख्या 10 लाख 79 हजार 65 है।
सी ओ सर्किल : ब्यावर जिले में:- ब्यावर वृत, मसूदा वृत, जैतारण वृत
पंचायत समिति: रायपुर, जैतारण, मसूदा, जवाजा, बदनौर।
नगर परिषद्: ब्यावर
नगर पालिका ः जैतारण एव बिजयनगर
विधान सभा क्षेत्र: ब्यावर मसूदा व जैतारण
जिले में उपखण्ड: ब्यावर, टाटगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा, बिजयनगर, बदनौर, भीम
तहसीले: ब्यावर, टाटगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा बिजयनगर, बदनोर व भीम की बार उप तहसील
थानें: ब्यावर शहर, सदर साकेतनगर (अधिसूचना शेष) मसूदा, जवाजा, टाटगढ़, बिजयनगर (नवसृजित) रायपुर, जैतारण, बर, रास, सेन्दड़ा, आनन्दपुर-कालू, बदनोर एव बार।
इन विधान सभा की तहसीलें और उप तहसीले ब्यावर जिले में:- भीलवाड़ा जिले की आसीन्द विधानसभा का बदनोर क्षेत्र एवं राजसमंद जिले के भीम विधान सभा क्षेत्र का बार उपतहसील क्षेत्र की सात ग्राम पंचायतें।
चिकित्सा:- 300 बेड़ का राजकीय अमृत कौर जिला अस्पताल। इसी अस्पताल में आक्सीजन के चार प्लाण्ट । नये भवन का बजट स्वीकृत जिसके लिये जगह का चिह्नीकरण किया जा रहा है। जिले के जैतारण में जिला अस्पताल सहित सी एच सी स्तर के अस्पताल है। ब्यावर में ए एन एम सेंटर संचालित है। मसूदा में नरसिंग कालेज चालू होगा।
जलापूर्ति:- जलापूर्ति के लिहाज से ब्यावर जिला बिसलपुर बांध पर आश्रित है। शहर सहित क्षेत्र को प्रतिदिन 27 एमएलडी पानी मिलता है जैतारण व रायपुर जवाई परियोजना से जुड़े है। इनमें काम चल रहा है।
शिक्षाः उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देखें तो जिले में कुल आठ सरकारी कॉलेज है। जिनमें ब्यावर का सनातन धर्म राजकीय महा विद्यालय, बालिका कन्या महाविद्यालय, जैतारण में पी.जी. महाविद्यालय, बर, रायपुर मसूदा, बिजयनगर, बड़ा खेड़ा में महाविद्यालय है। इसमें बड़ा खेड़ा में इस वर्ष पहला सत्र शुरू होगा।
सड़क व रेल परिवहन:- ब्यावर जिले में ब्यावर रेल्वे ए श्रेणी का है। जिला रेल्वे स्टेशन भी बड़ा है। बाँगड़ ग्राम रेल्वे स्टेशन में परिवहन के लिहाज से बड़ा यार्ड तैय्यार हुआ है। इसके अलावा खरवा, बांगड ग्राम, अमरपुरा, सेन्दडा, बर, हरिपुर रेल्वे स्टेशन शामिल हुए है। ब्यावर में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग सहित दो राज्य राजमार्ग भी शामिल हुए है।
कृषि उपज मंडी समिति - ब्यावर जिले में तीन कृषि उपज मन्डी होगी। इसमें ब्यावर, जैतारण व बिजयनगर की कृषि उपज मंडी है।
औद्योगिक बदलाव - पाली जिले के जैतारण व रायपुर के ब्यावर जिले में शामिल होने से औद्योगिक दृष्टि से मजबूती मिलेगी। सीमेण्ट चूना व केबल इण्डस्ट्रिज ब्यावर जिले में आएगी। इसमें रायपुर व जैतारण आने से सात सौ करोड़ की केवल इण्डस्ट्रिज, दो हजार करोड़ की सीमेण्ट इण्डस्ट्रि एव चार सो से अधिक चुना व पत्थर की फैक्ट्रियों के टर्नओवर व रोजगार का फायदा ब्यावर जिले को मिलेगा। सराधना रीको क्षेत्र भी ब्यावर में आ जाएगा इससे व्यापारियों को पाली नहीं जाना पड़ेगा।
ग्राम-पंचायते - ब्यावर जिले में 184 ग्राम पंचायते शामिल की गई है जो इस प्रकार है- ब्यावर की 38, टाटगढ़ की 8, मसूदा की 25, बिजयनगर की 15, बदनोर की 20, रायपुर की 40, जैतारण की 38
जनसंख्या - ब्यावर की 304873, टॉटगढ़ की 38052, मसूदा की 122677, बिजयनगर की 95925, बदनोर की 85185, रायपुर की 205428, जैतारण की 226925
क्षेत्रफल हेक्टेयर में - ब्यावर 46689, टाटगढ़ की 22525, मसूदा की 54747, बिजयनगर की 31657, बदनोर की 38154, रायपुर की 108222 और जैतारण की 137620
मुख्यालय से दूरी किलोमीटर में - ब्यावर जिले में ब्यावर तहसील की दूरी 00 टाटगढ़ की 70, मसूदा की 22, विजयनगर 50, बदनोर की 40, रायपुर 35 जैतारण 50 इसके अतिरिक्त ब्यावर मे सिरेमिक और टाईल्स इण्डस्ट्रिज लगने की भी संभावना है। इससे भी मार्केट के टर्न ओवर और रोजगार में ईजाफा होगा। नई औद्योगिक इकाईयों के लगने से सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी। उम्मीद लगाई जा रही है कि ब्यावर जिला अकेला दस हजार करोड़ का सालाना राजस्व सरकार को दे सकेगा। अतः आने वाले कुछ ही वर्षों में ब्यावर राजस्थान प्रदेश ही नहीं अपित् भारत देश अग्रहणी जिलों में शुमार होगा जो शुभ संकेत है। इसी प्रकार ग्रेनाईट स्टोन मार्केट की भी पूर्ण सम्भावना है।
 
इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker
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