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‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से.......
www.beawarhistory.com
✍वासुदेव मंगल की कलम से....... |
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छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com
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*7 अगस्त 2026 ब्यावर जिले की तीसरी बर्ष
गाँठ पर विशेष*
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लेखः वासुदेव मंगल, ब्यावर
7 अगस्त ब्यावर को जिला बने आज तीन साल हो गए। ब्यावर का कितना विकास हुआ
विवेचनात्मक अध्ययनः अतीत में ब्यावर (तत्कालिन नया नगर) तहसील एक विकसित
साधन सम्पन्न मेरवाड़ा बफर स्टेट का भारत का राजपूतना में एक समृद्ध
व्यापारिक केन्द्र था। समय के साथ इसके स्टेटस में बदलाव आया। स्वतन्त्रता
तक भली प्रकार था। गणतन्त्र देश का ब्यावर, अजमेर राज्य का जिला बना जो
1956 की अक्टूबर तक कायम रहा। परन्तु इसके बाद राजनैतिक पराभव के कारण
ब्यावर को सब डिविजन बनाया गया। ब्यावर का कद छोटा कर दिया गया जो साढ़े
छासठ साल तक विकास को रोक दिया गया।
7 का फिगर बृहस्पति (गुरु) का होता है। गुरु की दृष्टि जिस पर पड़ जाय वह
विकास के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। ब्यावर के भाग्य ने भी पलटा खाया।
ब्यावर को जिले का तमगा दिया गया 7 अगस्त 2023 में। आज तीन साल हो गए। इस
दरम्यान जिले का कितना विकास किया गया। इस पर यह लेख केन्द्रित हैः-
प्रशासनिक दृष्टि से जिलाधीश पुलिस अधीक्षक और जिला न्यायाधिश कार्यालय
संचालित हो चुके है। राजनैतिक दृष्टि से जिला परिषद भी आरम्भ हो जायेगी। जहां
तक स्थानीय प्रशासन का प्रारूप भी अब परिषद से निगम का होना चाहिए क्योंकि
अब ब्यावर सिटी का विस्तार साठ वार्डों में कर दिया गया है।
*पहलाः* ब्यावर नगर को कोरपोरेशन मे उन्नत
किया जाना चाहिए।
*दूसराः* साथ ही जिले की सीमा चालिस-पचास मील
के चारों तरफ दायरे मे फैल चुकी है अतः विकास के अन्तर्गत विकास प्राधिकरण
का निर्माण भी आवश्यक है। ब्यावर जिले की इस साल सालगिरह पर सरकार ब्यावर
को कौनसा तोहफा प्रदान कर रही यह देखना है? हो सकता है ब्यावर नगर निगम और
ब्यावर विकास प्राधिकरण दोनों बना देवे।
*तीसराः* स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो
अब जिला अस्पताल मे प्रत्येक असाध्य रोग के विशेषज्ञों की नियुक्ति आवश्यक
हो गई है। साथ ही मेडीकल शिक्षा के लिए भी कालेज खोला जाना चाहिए। जांच की
समस्त मशीने उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
*चौथाः* कानून की पढ़ाई का आवश्यक प्रबन्ध किया
जाना चाहिए।
*पाँचवाः* तकनिकी पढ़ाई हेतु इंजिनियरिंग
कालेज की व्यवस्था की जानी चाहिए।
*छठाः* क्रॉनिक व्यापार ऊन, रुई, अनाज व वायदा
व्यापार फिर से शुरू किया जाना चाहिए। खुशहाली व्यापार के जरिये आयेगी।
रोजगार की समस्या हल होगी। मुद्रा का त्वरित परिचालन होने से जीवन स्तर
बढ़ेगा। आर्थिक चक्र तेजी से घूमेगा।
*सांतवा:* प्रकृति ब्यावर पर विशेष मेहरबान
है ब्यावर जिले में सघन वन और खनिज सम्पदा दबी भरी पड़ी है जिनका वैज्ञानिक
तरीके से तकनिकी साधनों के उपयोग से दोहन किया जाना है। यहां पर केपीटल
मार्केट है। स्किल्ड लेबर है, परिवहन के सुगम साधन व मार्ग और गोदाम
व्यवस्था है। कच्चा माल (रा-मटिरियल) बहुतायत में उपलब्ध है जैसे- प्रीसीयस,
ग्रेनाईट स्टोन एवं फैल्स्पार पाउडर, पावर की कोई कमी नहीं है। अतः टाईल्स
उद्योग, ग्रेनाईट स्टोन इण्डस्ट्रिज लगाकर जिले का सघन और सर्वागिन विकास
किया जा सकता है मोटीवेशन राज्य सरकार का होना चाहिए।
आवश्यकता है सरकार की इच्छाशक्ति होना। फिर आप देखियेगा ब्यावर जिले की
रैपिड ग्रौथ सरकार की रेवेन्यू में अभूतपूर्व ईजाफा होगा। चारों ओर खुशहाली
नजर आएगी।
ब्यावर जिले की एनीवर्सरी पर लेखक एवं परिजनों की सभी जिलेवासियों को बहुत
बहुत बधाई एवं शुभकामना।
जिले का विकास सम्भव हैै जो राज्य सरकार की सद्भावना पर निर्भर है सरकार को
इसे मूर्त रूप देना चाहिए। आप देखिए जिप्सम रा मटीरियल से ब्यावर का
सिमेण्ट प्लाण्ट राष्ट्रीय स्तर का प्लाण्ट बना। तो ब्यावर में क्या कुछ नहीं
है। ब्यावर की मिट्टी में चुम्बकीय शक्ति है। ब्यावर व्यापारिक राजमार्गों
का जंक्शन है। यहाँ पर एन्टी करप्शन का ऑफिस खोला गया है जो सरकार की
दूरदर्शिता का घोतक है। चूँकि मादक पदार्थों का परिवहन इन्हीं मार्गों से
होता है। अतः ब्यावर राज्य का केन्द्रिय स्थल होने से अहमियत रखता है। यहाँ
पर अरावली अभ्यारण्य पर्यटन स्थल विकसित किया जाना चाहिए। यहां का
दूधलेश्वर महादेव पर्यटन स्थल नयनाभिराम स्थल है। दूसराः गौरम घाट नैसर्गिक
पर्यटन स्थल है। यहां का नील कण्ठ महादेव स्थल भी प्राकृतिक छटा से
आच्छादित है यहाँ पर चौबिस किले नो घाटे (दर्रे) भी ब्यावर जिले की उपलब्धि
है। देव नारायण भी अच्छा स्थान है यहाँ पर माँगट की डांग भी काबिले तारीफ
हैं। चॉंग की धूणी, बिरांठिया का रामदेवजी का मन्दिर धार्मिक स्थल है, पास
ही मेड़ता की मीरा बाई का मन्दिर भी दर्शनीय स्थल है।
ब्यावर का तेजा मेला और बादशाह मेला भी सांस्कृतिक विरासत है। अतः सरकार को
ब्यावर का महत्व भली भांति समझना चाहिए। यहाँ मारवाड़ मेवाड़ और मगरे की मिली
जुली संस्कृति विद्यमान है। पास मांगलियावास के कल्पवृक्ष, ऐतिहासिक अजमेर
और पुष्करराज भी पर्यटन केन्द्र है। अतः ब्यावर रणकपुर जोधपुर, नाथद्वारा,
चित्तौड़गढ़ और उदयपुर का महत्वपूर्ण केन्द्रीय पर्यटन स्थल बन सकता है। अतः
राज्य सरकार को निकट भविष्य में इस जिले का भली प्रकार से विकास सुनिश्चित
करना चाहिए। ब्यावर चारों तरफ के पर्यटन स्थलों का केन्द्रिय विराम (विश्राम)
स्थल हो सकता है। सरकार का आर्थिक चक्र बहुत तेजी से घूमेगा। इससे चारों
तरफ खुशहाली का साम्राज्य स्थापित हो सकेगा।
यह एक सृजनशील, जागरुक लेखक के विचार है जिन्हें शीघ्रताशीघ्र राज्य सरकार
द्वारा क्रियान्वित किए जाए। वाजिब जानकर लिखा है। इसी जिला स्थापना
एनीवर्सी पर कुछ कार्य तो राज्य सरकार को आज से ही लागू करने चाहिए तभी जिला
एनीवर्सरी की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी ऐसा लेखक का मानना है।
07.08.2026
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ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प
इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker
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