‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से....... 
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......  

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com


आज दिनांक 31 अक्टूबर 2025 को सरदार वल्लभ भाई पटेल - भारत के एकीकरण के शिल्पी की 150 वीं जयन्ती पर विशेष
ब्यावर को सब डिविजन बनाये जाने का रोचक प्रसंग

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वासुदेव मंगल: स्वतन्त्र लेखक, ब्यावर

सरदार वल्लभ भाई पटेल लौह पुरुष थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत के गृह मन्त्री रहते चट्टान की तरह 562 रियासतों को भारत संघ मंे मिलाने का अभूतपूर्व अदभुत कार्य किया जो और किसी अन्य व्यक्ति के वश की बात नहीं थी। राजपूताना प्रदेश की भी 22 रियासतों को मिलाकर विशाल राजस्थान प्रदेश बनाये जाने का भी अद्भुत चमत्कृत राज्य बनाया। उस वक्त राजस्थान के मध्य में स्थित अजमेर राज्य स्वतन्त्र भारत का ‘स’ श्रेणी का अलग राज्य था जिसका जिला ब्यावर था। इस राज्य के दो संसद सदस्य थे दिल्ली की पार्लियामेन्ट में। ब्यावर के श्री मुकुट बिहारीलालजी भार्गव ने भारत के संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य के रूप में संविधान किताब पर हस्ताक्षर किए जो विधि एन्साइक्लोपीडिया के नाम से विख्यात थे। ब्यावर के लिए यह गर्व की बात है।
यद्यपि ब्यावर जिले का विलय राजस्थान प्रदेश मे 1 नवम्बर सन् 1956 ई० में हुआ था। यदि सरदार पटेल जीवित होते तो ब्यावर उसी समय राजस्थान प्रदेश का जिला होता। लेकिन कुदरत को यह ही मन्जूर था। हालांकि तत्कालिन केन्द्रीय गृह मन्त्री श्री गोविन्द वल्लभ पन्त जो राज्य पुनर्गठन समीक्षा समिति के अध्यक्ष थे ब्यावर को जिला बनाये जाने के पक्षधर थे परन्तु एन वक्त पर सियासी चाल ने ब्यावर को अजमेर जिले का सब डिवीजन बनाकर ब्यावर क्षेत्र के मन्सूबों पर कुठारागात कर पानी फेर दिया। राज्य पुर्न्गठन आयोग की सिफाारिश के अनुसार अजमेर राजधानी और ब्यावर जिला बनाया जाना अक्षरस् तय हुआ था परन्तु जयपुर महाराजा सवाई मानसिंहजी द्वितीय के राजहठ जयपुर को राजधानी बरकरार रखने के कारण शत प्रतिशत पारित प्रस्ताव को बदलकर एन वक्त पर तस्कालिन राजस्थान प्रदेश के मुख्य मन्त्री श्री मोहनलालजी से सुखाड़िया ने सियासी चाल के तहत अजमेर और ब्यावर के नेताओं को विश्वास मंेे लेकर जयपुर महाराजा को उपकृत करने मेें कामयाब हो गए तब से ब्यावर की राजनैतिक की हत्या कर दी गई जिसे हमेशा के लिए अजमेर जिले के अधीन सब डिविजन बनाकर रख दिया गया।
आज लौहपुरुष की बरबस लेखक को याद आ रही है। यदि वे होते तो कदापि सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव दोनों राज्य पुन्गर्ठन आयोग एवं राजस्थान प्रदेश पुन्गर्ठन समीक्षा समिति का पारित प्रस्ताव अमल में आता और ब्यावर स्थापना से रहा व्यापारिक केन्द्र आज तो भारत के सर्वाेत्तम जिलों में शुमार होता। तो ऐसी होती है सियासी चाल जिसने ब्यावर क्षेत्र की भावी प्रगति को आसमान से गिराकर फर्श पर लाकर पटक दिया। ब्यावर के राजनैतिक भाग्य को नेशनाबूद कर दिया। क्या मिला ऐसा करके सियासतदानों को यह तो वो ही जाने? पर ब्यावर तो अपनी बदनसीबी पर आंसू बहा रहा है। ब्यावर उस समय व्यापार की प्रगति का पर्याय माना जाता था भारत में। ऐसा तो कभी सोचा भी न था कि घर को लगा दी घर के ही चिरागों ने। खैर - ब्यावर के नसीब में यह ही लिखा था।
अब चूँकि 7 अगस्त सन् 2023 ईसवी को ब्यवार को भी देर से ही सही जिला घोषित कर दिया गया है। इस बात को भी दो साल दो महीने बीत चुके है। राजस्थान प्रदेश सरकार के कर्णधारों से लेखक की मार्मिक अपील हैं कि जिले की बहुमूल्य खनिज सम्पदा ग्रेनाईट कीमती स्टोन की ट्रेड मण्डी ब्यावर जिले में ही बनाई जावे न कि अजमेर जिले के किशनगढ़ सिटी में जिससे सरकार को अथाह राजस्व ब्यावर जिले के विकास मे प्राप्त हो सकेगा जो ब्यावर के चहुँमुखी विकास मे योगदान करने मे साबित होगा। यह लेखक के विचार है। लेखक स्वयं एक जागरुक वरिष्ठ नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता होने साथ साथ ब्यावर का सृजनशील स्वतन्त्र लेखक एवं इतिहासविज्ञ है।
लेखक ने सन् 1990 में तत्कालिन ब्यावर के सब डिविजन आफीसर डा. श्री बी. शेखर आई.ए.एस. ट्रेनी की प्रेरणा से सेतु पत्रिका के लिए चार पृष्ठ का ब्यावर का इतिहास मुख्य मुख्य बिन्दुओं का संक्षिप्त इतिहास लिखा जिससे जन साधारण को पैंतिस सालों से ब्यावर के इतिहास की जानकारी हासिल हो रही है। चूँकि वि-अवेयर शहर बसाने वाले शिल्पी कर्नल चार्ल्स जार्ज डिक्सन अँग्रेज इसाई विदेशी भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के मुर्शिदाबाद में 1872 मे बंगाल आर्टिलरी रेजिमेण्ट में कर्नल रैंक के सैन्य अधिकारी थे जिन्होंने सन् 1835 ई0 में राजपूताना गजेटियर मे नोटिफिकेशन जारी कर बसाया था जो बेजोड़े शिल्पकला का जयपुर शहर के मॉडल पर बसाया गया शहर है। यह ट्रेड सेन्टर के साथ साथ शिक्षा, चिकित्सा, का केन्द्र रहा है। कर्नल सी. जी. डिक्सन की लिखी अंग्रेज़ी मे स्केच ऑफ मेरवाड़ा पुस्तक में इस क्षेत्र का विस्तृत विवरण है। लेखक तब से स्वतन्त्र लेखन में मशगूल है। सम सामयिक लेखन के पक्षधर है। जो उनकी मौलिक वेबसाइट ब्यावर हिस्ट्री डाट काम है पर सन् 2002 से उनके अपने मौलिक लेखों से पूरी दुनियाँ को लाभान्वित हो रही है। ब्यावर के लिए यह एक बड़े गर्व की बातें है कि ब्यावर की सब प्रकार की विस्तृत जानकारी इस वेबसाईट के माध्यम से पूरी दुनिया को हो रही है अर्थात् पूरी दुनियाँ ब्यावर की खूबियों से रूबरू वाकिफ है यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है।
अतएव भारत सरकार और राजस्थान की प्रदेश सरकार ब्यावर जिले के प्राकृतिक सन साधनों को ध्यान मे रखते हुए ब्यावर जिले का सघन और समग्र विकास करेगी ऐसी लेखक को अपेक्षा है जो द्रुत गति से शीघ्रताशीघ्र हो सके। ऐसा प्रयास दोनो सरकार को करना चाहिए। ताकि अकूत सरकारी राजस्व की भरपूर प्राप्ति हो सके। लेखक बैंक कर्मी भी रहे है जिससे आर्थिक जगत की जानकारी भी रखते है। समालोचना के लेखक है। लेखक के 1990 से प्रयास रंग लाये। सन् 2023 मे ब्यावर को मिला जिले का दर्जा। आखिर सरकार ने ब्यावर की अहमियत समझी।
*सरदार पटेल की 150वीं जन्म जयन्ती पर लेखक एवं परिजन का पटेल को शत्- शत् नमन्। *
31.10.2025
 

 

ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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