‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से....... 
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......  

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com


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1 फरवरी को ब्यावर का 190वाँ स्थापना दिवस
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आलेख: वासुदेव मंगल, ब्यावर

1 फरवरी सन् 1836ईसवीं को ब्यावर नगर के प्रवेश द्वार अजमेरी गेट के दाहिने गोखे के नीचे केकड़ी, देवली के शिवलालजी श्रीलालजी महाराज द्वारा सनातन विधि विधान से प्रातः सात 7 बजे पूजा पाठ करवाकर शहर के शिल्पकार कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन ने बड़ी उमंगे के साथ नये शहर की आधार शिला रखी।
अतः आज ब्यावर शहर को स्थापित हुए 189 साल पूरे हुए, और 190 वां स्थापना दिवस है। यह शुभ मुहूर्त ब्यावर को एक शताब्दी तक फला फुला यहाँ तक 121 साल तक। लेखक इस शहर को शुकूनयुक्त मानते है क्योंकि इसकी बसावट हुबहू ईसाई धर्म के पवित्र चिन्ह क्रॉस की आकृति पर बसाया जाना मानते हैं।
आप देखिये डिक्सन स्वयं सर्व धर्म समभाव के प्रणेता थे जो क्रिश्चियन होते हुए भी सभी घरमों का आदर सत्कार किया और क्रॉस की पट्टिकाओं के आधार पर शहर की सुन्दर खूबसूरत चारों दिशाओं में चार कलात्मक 32 फीट ऊँच वरवाजों के साथ ग्यारह चौराहों के साथ चार मुख्य बाजारों का निर्माण कर दरवाजों को एक सुन्दर क्रॉस की आकृति पर कंगूरेदास परकोटा 21 फीट ऊँचा 6 फीट चौड़ा बनाकर 36 बुर्जियों के साथ जोड़ा।
अब आगे आप देखिये। क्रॉस के मुख्य बिन्दु को मुख्य चौपाटी का आधार माना। अब बाजार के दस चौराहो से वर्टीकल एवं हारीजेन्टल लाईने ठेठ परकोटे तक खींचीं। ये लाईन जहां पर क्रास हुई वहाँ पर हर कालोनी (मोहल्ले) का चौराहा बनाया। इस प्रकार प्रत्येक चौराहे से चारों दिशाओ मंे सड़क का निर्माण कराया जिसके दोनों तरफ नाली का निर्माण फिर किनारों पर चबूतरी के साथ पोल का निर्माण दो गोखों के साथ कराकर हवेलीयों का निर्माण कराया जिसमें अन्दर चोक के साथ बरामदे कमरों का निर्माण कराया गया। इस प्रकार बीस बाईस मोहल्लों को बनाकर अलग अलग जाति धर्मों के आधार पर बसाया गया।
आप देखिये यह सुन्दर रचना इस प्रकार की थी कि प्रत्येक मोहल्ले की सड़क सीधी बाजार के चौराहे से मिलाई गई। प्रत्येक मोहल्ले के चौराहे से उस मोहल्ले विशेष की चारों तरफ की बसाबट स्पष्ट दिखलाई देती है यहां तक की बाजार के चौराहे की रौनक भी नजर आती है।
डिक्सन ने वूल और कॉटन के व्यापार का मर्केण्टाईल सिटी बनाया। इस ट्रेड के अनुरूप नोहरों का निर्माण किया।
परन्तु कहते हैं कि अच्छे वक्त के साथ बुरा वक्त भी आता है ब्यावर को मेरवाड़ा बफर स्टेट बनाकर उस वक्त ‘‘स्वतंत्र स्टेट’’ का दर्जा दिया। ऐसा सिस्टम और कहीं पर नहीं था राजपूताना मे देशी रियासतों मंे राजा महाराजाओं के अपने अपने स्वच्छन्द शासन थे। अंग्रेज़ों को तो मात्र अपने लगान से सरोकार था। वे देशी राजाओं के शासन में दखल अन्दाजी नहीं करते थे बाह्रय तौर से सारे भारत में एक छत्र इनका राज होता था। यह ही उस वक्त का दस्तूर था उनका।
डिक्सन के निधन के पश्चात् एक दिसम्बर सन् 1858 ई० में ब्रिटेन की सरकार ने भारत का शासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी से अपने हाथ में लेकर अपना वायसराय नियुक्त कर दिया भारत में। लेकिन ब्यावर मे क्रिश्चियनिटी मिशनरी 1859 में आई ब्यावर में वह भी अपने धरम के प्रचार प्रसार में ही लगी रही शहर से बाहर रहकर। परिणाम यह हुआ कि ब्यावर में 1857 से लेकर 1872 पन्द्रह साल तक शहर में अराजकता रही जिससे एक बार तो ब्यापार ठप्प हो गया। परन्तु सन् 1872 मे चर्च चालू होने से मिशन बाय्ज स्कूल चालू हुआ और अंग्रेज कमीश्वर की नियुक्ति हुई तब जाकर शहर पटरी पर आया दोबारा। परन्तु आजादी के बाद अंग्रेजों के जाने से ब्यावर का जल जंगल जमीन रचतन्त्र थीं जिसका दुरुपयोग किया जाता रहा है। अब चूंकि जिला बनाया गया है। उम्मीद है अब ब्यावर के भाग्य पलटा मारेंगें और अतीत के गौरव की तरह ब्यावर फिर से विश्व के क्षितिज पर चमकेगा। स्थापना दिवस पर लेखक व परिजन की ब्यावरवासियों को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।
01.02.2025
 
 

ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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