‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे से....... 
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✍वासुदेव मंगल की कलम से.......  

छायाकार - प्रवीण मंगल (फोटो जर्नलिस्‍ट)
मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर
Email - praveenmangal2012@gmail.com


ब्यावर का 190 साल का लेखा
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आलेख : वासुदेव मंगल: स्वतन्त्र लेखक
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पहाड़ी पठारी जंगली ईलाके में नया नगर तहसील के रूप में विअवेयर आबादी शहर को एक परदेशी शिल्पी ने सन् 1835 में राजपूताना गजेटियर में अधिसूचना जारी कर सन् 1836 में बसाकर भारत के कॉटन ट्रेड का सेन्टर बनाया जिसका पृष्ठ भाग अरावली पर्वत श्रँखला मेवाड और मारवाड़ का रेगिस्तानी भाग मेरवाड़ा बफर स्टेट कहलाया। राजपूताना प्रान्त में स्थित ब्यावर कॉटन वूल ट्रेड सेन्टर जैसी तत्कालिन पूरे भारत में तब कुल ऐसे नो ट्रेड सेन्टर थे। दूसरे सेन्टर में सिन्ध प्रान्त में 190 साल पहले मीरपुर खास शहर था। तीसरे नम्बर पर पंजाब प्रान्त का फाजिल्का शहर था। चौथे नम्बर पर उत्तर भारत का कानपुर शहर था। पाँचवें नम्बर पर मध्य भारत का इन्दौर शहर था। सात-आठ-नो नम्बर पर बम्बई प्रान्त का बम्बई, अहमदाबाद, भावनगर और राजकोट शहर थे। इस प्रकार भारत में 1835-40 में कुल नो व्यापारिक शहर थे।
अंग्रेज हुक्मरान डिक्सन द्वारा बसाया गया ट्रेड सेन्टर ब्यावर शहर उस समय राजपूताना रियासत प्रान्त का मेनचेस्टर शहर के नाम से विश्व विख्यात था। यह जयपुर शहर का मिनी मॉडल शहर है फर्क मात्र इतना ही है कि जयपुर शहर की सात घोड़ो से जुते हुए सारथी वाले रथ की आकृति है और ब्यावर क्रोस की आकृति वाला शहर हैं। दोनो ही शहर शिल्पकला के बेजोड़ नमूने है।
ब्यावर ईलाके में मिक्स कल्चर हैं यहाँ पर तत्कालिन राजपूताना सामन्त शाही भिन्न भिन्न देशी रियासतों से सभी वर्गो, जाति, धर्म के लोग आकर बसे। इसलिए यहां पर, मारवाड़ी, मेवाड़ी, शेखावाटी, मेवाती, होड़ौती, ढूंढ़ारी, बागड़ संस्कृति का मिश्रण बोली, वेसभूषा, खान-पान एवं रहन-सहन सभी में दृष्टिगोचर होता है।
अंग्रेज सैन्य अधिकारी द्वारा बसाये जाने के कारण इस शहर का पैटर्न उच्च कोटि का रहा है शिक्षा, चिकित्सा, सोश्यल कल्चर, ट्रेड, इण्डस्ट्रीज, धार्मिक समरसता आदि-आदि फील्ड में। यह ट्रेण्ड सन् 1835 से लेकर 1956 एक सो 21 बरस तक क्लाईमेक्स (चरम) सीमा तक फलता-फूलता रहा। कहते है ना ईलाके (क्षेत्र) के भी दिन बदलते है। बड़े उनमने मन से लिखना पड़ रहा है कि ब्यावर के भाग्य भी सन् 1956 में पलटे कि राजस्थान प्रान्त (प्रदेश) में मिलाए जाने पर एक नवम्बर 1956 अर्थात् उनत्तर बरस पहले जयपुर को राजधानी बरकरार रखने के चक्कर में ब्यावर के जिले की बलि चढ़ाई गई। यह ब्यावर का बद्नसीब था। इस प्रकार ब्यावर क्षेत्र ने दूसरे चरण में उन्नत्तर साल तक अवनति काल देखा।
अब 7 अगस्त सन् 2023 में ब्यावर के भाग्य ने एक बार फिर से पल्टा खाया हैं ठीक एक सो 90 साल बाद ब्यावर को राजस्थान प्रदेश के जिले से नवाजा गया है। बड़ी खुशी की बात हैं वर्तमान की राज्य और केन्द्र सरकार यदि दिल से इसका विकास करना चाहती है तो इस जिले का सभी मायने में कलेवर बहुत समृद्धशाली है। आवश्यकता है मात्र दिलचस्पी लेकर योजनाबद्ध तरीके से अगर विकास किया जाय तो अतीत के गौरव की भाँति ब्यावर जिला राजस्थान प्रदेश का ही नहीं अपित् भारत देश के सर्वोत्तम जिले में शुमार अल्पकाल में ही हो सकता है क्योंकि यहाँ पर सरकार के भरपूर राजस्व प्राप्ति की गुंजाईश उपलब्ध है इसलिए।
लेखक विजिलेन्ट सिविलियन एवं सोश्यल सीनियर सिटीजन एक्टीविष्ट है। साथ ही स्थानीय इतिहासविज्ञ भी है।
13.10.2025
 

ब्यावर के गौरवमयी अतीत के पुर्नस्थापन हेतु कृत-संकल्प

इतिहासविज्ञ एवं लेखक : वासुदेव मंगल
CAIIB (1975) - Retd. Banker

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