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‘‘ब्यावर’ इतिहास के झरोखे
से.......
✍वासुदेव मंगल की कलम से.......
ब्यावर सिटी (राज.)
छायाकार - प्रवीण मंगल (मंगल फोटो स्टुडियो, ब्यावर)
ब्यावर विधानसभा क्षेत्र से सन् 1957
से चूने जाने वाले विधायक और उनका कार्यकाल निम्न प्रकार हैः-
1. पं. बृजमोहन लाल शर्मा कांग्रेस 1957 से 1962 तक
2. स्वामी कुमारानन्द भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी 1962 से 1967 तक
3. मेजर फतेहसिंह स्वतंत्र पार्टी 1968 से 1972 तक
4. कॉमरेड केसरीमल भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी 1972 से 1977 तक
5. उगमराज मेहता भारतीय जनता पार्टी 1977 से 1980 तक
6. उगमराज मेहता भारतीय जनता पार्टी 1993 से 1998 तक
7. विष्णु प्रकाश बाजारी कांग्रेस 1980 से 1984 तक
8. माणक डाणी कांग्रेस 1984 से 1989 तक
9. चम्पालाल जैन निर्दलीय 1989 से 1993 तक
10. डा. के. सी. चौधरी
मुलतः किशनगढ निवासी कांग्रेस 1998 से 2003 तक
नवम्बर सन् 2003 के अन्त में 12वीं राजस्थान असम्बली के चुनाव होने वाले
है।
वर्तमान में शासन पद्वति शिक्षा और चिकित्सा व राजनिति सेवा कार्य न
होकर व्यवसाय बन गया है। ऐसे हालत में शासन और प्रतिपक्ष की भूमिका अति
महत्व की नहीं रह गई है।
अतः ब्यावर व राजस्थान और भारत की जनता ही प्रतिपक्ष की मजबूत भूमिका
अपने मताधिकार का इस्तमाल विवेकपूर्ण करते हुऐ निभाएंे तो ही भारत
रामराज्य बन सकता हैं क्योंकि पहिले जमाने में राजनीति अपराध पर हावी
होती थी लकिन अब अपराध राजनीति पर हावी हो गया हैं। अतः स्वच्छ छवी वाले,
ईमानदार, कार्यकुशल, सेवाभावी व्यक्तियों को चूनकर ही ब्यावर, राजस्थान
व भारत की जनता नगरपरिषद्, विधानसभा व लोकसभा में पार्षद, विधायक व
सासंद के रूप में चूनकर भेजे तो ही ब्यावर, राजस्थान व भारत जैसे 104
करोड आबादी वाले देश का भला और कल्याण हो सकता है नहीं तो ऐसा होना
असम्भव है।
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सन् 2003 में ब्यावर एक नजर में
ब्यावर एक नजर में संख्या
कम्पयूटर सेन्टर 32
गैस एजेन्सी 4
केबल ऑपरेटर 4
फोटो कलर लेब 4
अपार्टमेन्ट 19
कोचिन क्लासेज सेन्टर 28
साइबर कैफे 18
डिपार्टमेन्टल स्टोर 5
मोबाइल एजेन्सी 4
मेाबाइल कम्पनी 3
ट््रान्सपोर्ट व्यवसायी 98
मेड़िकल स्टोर 108
राशन विक्रेता 65
फ्लोर मिल्स् 129
शू स्टोर 61
टाइंपिग इन्सटीटयूट 18
ऑटो रिक्शा शोप 42
स्टेशनरी विक्रेता 48
कोरियर सर्विस 15
दो पहियॉं वाहन विक्रेता 12
प्रिन्टिग प्रेस 42
चश्मे की दुकान 10
ट््रेवल एजेन्सी 12
दन्त क्लिनीक 8
सब्जी मण्डी 7
निजी चिकित्सालय 40
ब्यूटी पार्लर 95
पाट्य पुस्तक विक्रेता 14
टेण्ट हाउस डिलर 36
लाईट डेकोरेशन डिलर 25
ब्यावर एक नजर में संख्या
प्रोपर्टी डिलर 57
ैफैन्सी स्टोर 102
ज्वैलेरी शोप 46
इलेक्ट्र्ोनिक शोप 57
एस टी डी / पी सी ओ 167
सामाजिक संस्थाऐं 55
फोटो स्टुडियो 50
पेट्र्ोल पम्प 7
लघु समाचार पत्र 18
कॉलेज 4
सिनेमा हॉल 2
कपड़ा मिल्स 1
सिमेन्ट पाइप फैक्ट्र्ी 11
ति-पहीया वाहन 475
अखबार की एजेन्सी 6
टेलीविजन 18000
विघुत कनेक्शन 16132
साईकिल 65000
टेलिफोन कनेक्शन 2015
बर्तन की दुकान 35
इनडोर मार्केट 33
मार्केट 20
नगर 30
गंज 20
कॉलोनी 40
शिक्षण संस्थाऐं 150
लाइब्रेरी 4 |
ब्यावर एक नजर में ‘व्यापार और
उद्योग में’
175 वर्ष पूर्व का ब्यावर-एक फौजी छावनी।
150 वर्ष पूर्व का ब्यावर-एक सुन्दर व खुबसूरत शहर जिसे वैज्ञानिक ढंग
से बसाया गया।
125 वर्ष पूर्व का ब्यावर- भारत में उन और रूई की प्रमुख मण्डी जहॉं पर
प्रतिवर्ष लगभग 30 हजार बेल व उॅंट गाड़ियॉं उन और रूई की आया करती थी।
100 वर्ष पूर्व का ब्यावर- कल कारखानों में राजपूताना में अग्रहणी था
जहॉं पर कपड़े की मिलें व लगभग 20 कॉटन एवं वूलन जिनिंग एण्ड प्रेसिंग
फेक्ट्र्यिॉं थीं। उस वक्त ब्यावर राजपूताना का मेनचेस्टर कहलाता था।
75 वर्ष पूर्व का ब्यावर- वायदा सर्राफा व्यापार का राजपूताना में ही
नहीं अपित् भारत में प्रमुख केन्द्र था।
50 वर्ष पहले का ब्यावर- कुटीर उद्योग जैसे तम्बाकू, बीड़ी और तिलपपड़ी
में सम्पूर्ण भारत में इन उत्पादों का बाजार था। तिलपपड़ी तो भारत के
बाहर भी जाती है।
25 वर्ष पूर्व का ब्यावर- सिमेण्ट एस्बेस्टोज पाईप और जालियॉं बनाने
में अग्रहणी था जहॉं पर लगभग 375 लघु ईकाईयॉं कार्यरत थीं।
वर्तमान में सरकार की ब्यावर के व्यापार और उद्योगों के प्रति उदासीन
नीति ने ब्यावर शहर से उन, रूई, सर्राफा और अनाज की मण्डी हटाकर ब्यावर
के व्यापार को शून्य पर ला खड़ा कर दिया है। जिसका सीधा असर ब्यावर
क्षेत्र के व्यापारियों और मजदूरों के रोजगार पर हुआ। ब्यावर के लगभग
पॉंच हजार व्यापारी एवं लगभग इतने ही पॉंच हजार मजदूर बेरोजगार हो गये
जिसका सीधा असर उनके परिवार की रोटी रोजी पर पड़ा। इस प्रकार लगभग पचास
हजार ब्यावर क्षेत्र के निवासी व्यापार और कल-कारखानों के बन्द हो जाने
से भुखमरी के कगार पर आ खडे़ हुए। ब्यावर की 100 साल पुरानी कपड़ा मिलों
को बन्द कर दिया गया। इसी प्रकार रूई, उन के पेचों को बन्द कर दिया गया।
इसी प्रकार सिमेन्ट एस्बेस्टोज पाईप की लगभग 364 ईकाइयॉं बन्द हो गई।
ब्यावर की उन की मण्डी बीकानेर और केकड़ी बना दी गई। अनाज की मण्डी भी
जेतारण, आनन्दपुरकालू, केकड़ी इत्यादि जगहों पर स्थानान्तरित कर दी गई।
इस प्रकार ब्यावर के उन्नत व्यापार ओर उद्योग का ह्रास हुआ और ब्यावर
वर्तमान में उद्योग व्यापारविहिन हो गया। |
ब्यावर एक नजर में ‘राजनिति और शासन’
स्वतंत्र भारत के इतिहास में ब्यावर के क्रम अवनति की कहानी
1. 180 वर्ष पूर्व सन् 1823 में कर्नल हेनरी हॉल ने ब्यावर को राजपूताना
- मध्यभारत की एक केन्द्रिय फौजी छावनी बनाई।
2. सन् 1836 में कर्नल चार्ल्स जार्ज डिक्सन ने मगरा के बिहड़ जंगल में
एक उॅंचे पठार पर एक खुबशुरत सुन्दर नगर के रूप में वैज्ञानिक तरीके से
ब्यावर नगर को बसाया और अंगेजों द्वारा स्वयं के तथा मारवाड़ और मेवाड़
के जीते हुए गॉंवों को मिलाकर एक स्वतंत्र मेरवाड़ा प्रदेश बनाकर ब्यावर
को मेरवाड़ा प्रदेश का मुख्यालय बनाया जो सन् 1938 तक मेरवाड़ा प्रदेश का
मुख्यालय रहा।
3. सन् 1938 में 99 साल के लीज की समाप्ति पर मेवाड़ व मारवाड़ को उनके
गॉंव लोटाये जाने पर बाकी बचे गॉंवों को अजमेर के साथ जोड़कर अजमेर
मेरवाड़ा नाम रक्खा गया। इस प्रकार ब्यावर का भविष्य अजमेर के साथ जुड
गया।
4. सन् 1952 में केन्द्र शासित प्रदेश अजमेर को पूर्ण राज्य का दर्जा
दे दिया गया तब ब्यावर को अजमेर राज्य का जिला बनाया गया। इस काल में
ब्यावर में शिक्षा का विकास जरूर किया गया था।
5. एक नवम्बर सन् 1956 में जब अजमेर को राजस्थान प्रदेश में इस आशय से
मिलाया गया था कि अजमेर को राजस्थान राज्य की राजधानी बनाया जायेगा। उस
वक्त ब्यावर को राजस्थान प्रदेश का उपखण्ड का दर्जा दिया गया। यह क्रम
मई सन् 2002 तक चला जहॉं पर भारतीय प्रशासनिक/पुलिस अधिकारी नियुक्त
किये जाते रहे क्योंकि ब्यावर राजस्थान में 90 उपखण्डों में से सबसे बड़ा
उपखण्ड था।
6. वर्तमान में मई सन् 2002 में 360 गॉंवों वाले ब्यावर उपखण्ड को जिला
मुख्यालय बनाये जाने के बजाय खण्डित कर दिया गया और इसके 144 गॉंवों को
इससे अलग करते हुए अलग से मसुदा उपखण्ड बनाया गया। इस प्रकार मात्र 216
गॉंवों के समूह को ही ब्यावर खण्ड में रक्खा गया। इस प्रकार राजस्थान
के सबसे बडे़ ब्यावर उपखण्ड को क्रम अवनत कर दिया गया।
इस प्रकार हमारी चुनिन्दा सरकारों ने समय-समय पर ब्यावर के उन्नत
व्यापार और उद्योगो में ह्रास करते हुए आज वर्तमान में रसातल में
पहुॅंचा दिया हैं। ब्यावर को अलग जिला बनाकर विकास करने के बजाय उपखण्ड
को ही खण्डित कर दिया मात्र इस आशय से कि इसके पडोसी जिले भीलवाड़ा, पाली
और स्वयं अजमेर जिले का विकास ब्यावर को जिला बनाये जाने पर अवरूद्ध न
हो जाये। यहॉं तक कि उदयपुर का भीम के आगे तक का क्षेत्र आरम्भ से ही
ब्यावर से सम्बद्ध रहा हैं फिर भी इस क्षेत्र को उपयपुर से अलग कर
ब्यावर जिला नाम न देकर इस अलग किये गये क्षेत्र को राजसमन्द जिलेे का
नाम दिया गया जिसका मुख्यालय राजसमन्द को बनाया गया। |
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